प्रश्न है,
व्याख्या के साथ ग़ालिब ग़ज़ल
उत्तर हाज़िर है.
01.
गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूं तिश्ना लब पैगाम के।
02.
खास्तगी का तुम से क्या शिकवा कि ये
हथकंडे हैं चर्ख नीलीफाम के।
03.
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के।
04.
रात पी ज़मज़म पे मय और सुबह
हम
धोये धब्बे जामे एहराम के।
05.
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के।
व्याख्या
01
ग़ालिब कहते है की मै आशिक़ हूँ और प्यासा भी हूँ ,अपने महबूब की इज़ाज़त का इंतज़ार
कर रहा हूँ,
लेकिन इसी जगह दुसरे लोग खूब
शराब की महफ़िल जमाये हुए है.
02.
मैं अपनी कमज़ोरी की शिकायत किस से करूँ। मैं तो नीले आसमान की
तरह अपने गमो को छुपाने का हथकंडा अपनाये हुआ हूँ।
03.
मैं तो अपने महबूब को खत ज़रूर लिखूंगा, चाहे उसका कुछ भी मतलब न हो.
क्यों कि मैं अपने महबूबा के नाम से बेहद प्यार करता हूँ.
04.
मेरे हालात तो यह कि रात भर मैं शराब की महफ़िल जामये रहता हूँ.
और जब सुबह होती है तो अपने अच्छे होने का दिखावा करता हूँ. और हाजियों वाला लिबास
पहन कर दाग़ धब्बों को मिटने की कोशिश करता हूँ.
05.
मिर्ज़ा असदुल्लाह खां ग़ालिब का यह शेर बहुत ही मश हूर है.
ग़ालिब साहब कहते हैं की मुझे भी इश्क़ो मोहब्बत ने नाकारा बना
दिया. वरना हम भी बड़े काम के आदमी थे.
उर्दू में सर्वश्रेष्ठ ग़ज़ल के बोल.
उत्तर हाज़िर है.
लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शम्मा की सूरत हो खुदाया मेरी.
डाक्टर अल्लामा इक़बाल.
क्या ग़ज़ल लेखक को उन्होंने ग़ज़ल नवाज़ कहा?
उत्तर हाज़िर है.
जैसे नसर में कुछ भी लिखने वालों को नसर निगार कहते है.(जैसे कहानी, अफसाना आदि) इसी तरह से नज़्म में कुछ वालो को नज़्म निगार कहा जाता है. तो ग़ज़ल लिखने वालों को ग़ज़ल निगार कहेंगें।


1 Comments
Masha allah allah aap ka tarakqi ata farmaye
ReplyDeleteHello guys, let me know how the post is. And do share it among your friends. Thank you,
हेलो दोस्त , पोस्ट कैसी लगी ज़रूर बताएं, और अपने दोस्तों में ज़रूर शेयर करदें. धन्यवाद I